शनिवार को करें दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ, अटके काम खुलेंगे और मन की बेचैनी होगी दूर

शनिवार शनि उपाय

कई बार ऐसा होता है कि मेहनत पूरी करने के बाद भी नतीजा नहीं मिलता। काम आखिरी समय पर अटक जाता है, मन भारी रहता है और बिना वजह चिंता घेर लेती है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी स्थिति को अक्सर शनि के प्रभाव से जोड़ा जाता है। शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है और इस दिन दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

यह स्तोत्र केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता और धैर्य बढ़ाने का भी माध्यम माना जाता है। नियमित पाठ से व्यक्ति को आंतरिक शांति मिलती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।

क्यों असरदार माना जाता है दशरथकृत शनि स्तोत्र

मान्यता है कि जब राजा दशरथ शनि देव के प्रकोप से परेशान थे, तब उन्होंने यह स्तुति की थी। कहा जाता है कि शनि देव इस स्तोत्र से प्रसन्न हुए और राजा को राहत मिली। तभी से इसे शनि दोष शांति का प्रभावी उपाय माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि की महादशा में यह स्तोत्र विशेष लाभ देता है। जो लोग लंबे समय से संघर्ष, विलंब और मानसिक दबाव झेल रहे हैं, उन्हें शनिवार को इसका पाठ जरूर करना चाहिए।

कब और कैसे करें पाठ

शनिवार के दिन शांति से किया गया पाठ ज्यादा फलदायी माना जाता है। सुबह सूर्योदय से पहले या फिर शाम को सूर्यास्त के बाद पाठ करना अच्छा रहता है। साफ कपड़े पहनकर शांत जगह पर बैठें और शनि देव के चित्र या दीपक के सामने स्तोत्र का पाठ करें।

शुरुआत में 11 बार पाठ पर्याप्त है। इसके बाद धीरे-धीरे संख्या बढ़ाई जा सकती है। पाठ के बाद शनि मंत्र का जप करने से प्रभाव और बढ़ जाता है।

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इस स्तोत्र के पाठ से क्या लाभ मिलते हैं

दशरथकृत शनि स्तोत्र का नियमित अभ्यास करने वाले लोगों को कई प्रकार से फायदा होता है। कामों में आ रही अनावश्यक देरी कम होने लगती है। मन की बेचैनी और नकारात्मक सोच घटती है। नौकरी और व्यापार में स्थिरता आने लगती है। आर्थिक दबाव और कर्ज से राहत मिलने लगती है। पारिवारिक तनाव कम होता है और संबंध बेहतर होते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

पाठ करते समय मन में गुस्सा या जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। शनिवार को नशा और तामसिक भोजन से दूर रहना बेहतर माना जाता है। संभव हो तो जरूरतमंद को दान जरूर करें। यह शनि देव की कृपा पाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

शनि देव को न्याय और कर्म का देवता कहा जाता है। वे तुरंत फल नहीं देते, लेकिन सच्ची मेहनत और धैर्य का परिणाम जरूर देते हैं। अगर लंबे समय से मन अशांत है और प्रयासों के बावजूद रास्ते नहीं खुल रहे हैं, तो शनिवार को इस स्तोत्र को अपनाकर देखें। समय के साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

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