ऑक्सीजन की आपूर्ति पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- उद्योगों को नहीं अस्पतालों को ऑक्सीजन की जरूरत है

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस से बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में ऑक्सीजन टैंकर की कमी होने लगी है। पिछले दिनों महाराष्ट्र में डॉ जाकिर हुसैन अस्पताल से ऑक्सीजन लीक होने से 22 मरीजों की मौत की दुखद खबर भी मिली। हालात की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने मैक्स हॉस्पिटल की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देशभर के अस्पतालों में आपूर्ति को सुनिश्चित किया जाए।

हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्काल प्रभाव से औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति को बंद किया जाए। हाईकोर्ट ने सभी उद्योगों से कहा है कि वह अपने उपयोग के लिए उत्पादित ऑक्सीजन इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार को दे और सरकार इसे जरूरत के हिसाब से सभी राज्यों के अस्पतालों को आपूर्ति करे।

विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र सरकार को उद्योगों से ऑक्सीजन लेकर अस्पतालों तक पहुंचाने के तरीकों और साधनों पर विचार करने को कहा है। जरूरत पड़ने पर इसके परिवहन के लिए समर्पित कॉरिडोर या विशेष विमान का सहारा लेने को कहा है। न्यायालय ने कहा कि ‘हम अचंभित और निराश हैं कि अस्पतालों को ऑक्सीजन का कमी का सामना करना पड़ रहा है और स्टील प्लांट आसानी से चल रहा है।’

पीठ ने सवालिया लहजे में कहा कि ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोग मर रहे हैं और आपकी प्राथमिकता स्टील प्लांट का परिचालन जारी रखना है? पीठ ने सरकार से कहा कि यदि आवश्यक हो तो चिकित्सा इस्तेमाल के लिए स्टील और पेट्रोलियम सहित अन्य उद्योगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह से बंद किया जाए और इसे अस्पतालों को दिया जाए।

टाटा दे सकते हैं तो अन्य क्यों नहीं

उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि टाटा अपने स्टील प्लांट के लिए पैदा होने वाली आक्सीजन चिकित्सा जरूरतों और लोगों की जान बचाने के लिए दे सकते हैं तो अन्य उद्योग ऐसा क्यों नहीं कर सकते। न्यायालय ने उद्योगों के लिए तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह लालच की पराकाष्ठा है।

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